गाइड

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) कैसे चलती है

IPL भारत की फ़्रैंचाइज़ी T20 लीग है, जिसे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) चलाता है। यह गाइड बताती है कि एक सीज़न कैसे खेला जाता है, उसका फ़ैसला कैसे होता है और टीमें कैसे बनती हैं, वह भी हर साल बदलने वाली पॉइंट्स टेबल और स्क्वॉड की बातों के बिना।

लेखक: Manage Cricket टीम · अपडेट

विषय सूची

IPL क्या है

इंडियन प्रीमियर लीग फ़्रैंचाइज़ी टीमों का T20 टूर्नामेंट है, जिसमें हर टीम का एक होम शहर या राज्य होता है। इसकी शुरुआत 2008 में हुई और 2022 में दो नई फ़्रैंचाइज़ी जुड़ने के बाद से इसमें दस टीमें हैं। हर मैच 20-20 ओवर का आम T20 मैच होता है, और हर टीम में भारतीय खिलाड़ियों के साथ सीमित संख्या में विदेशी खिलाड़ी होते हैं।

लीग स्टेज

सीज़न एक लंबे लीग स्टेज से शुरू होता है। दस टीमों वाले फ़ॉर्मेट में हर टीम 14 लीग मैच खेलती है, और शेड्यूल ऐसे बनाया जाता है कि हर टीम कुछ टीमों से दो बार, होम और अवे, और बाकी टीमों से एक बार भिड़े। सारे नतीजे एक ही पॉइंट्स टेबल में जाते हैं:

IPL लीग के पॉइंट्स
नतीजापॉइंट्स
जीत2
कोई नतीजा नहींदोनों को 1-1
हार0

टाई मैच का फ़ैसला सुपर ओवर से होता है, जिसमें हर टीम एक ओवर खेलती है, इसलिए स्कोरबोर्ड पर टाई होने के बाद भी पॉइंट्स बंटने की नौबत कम ही आती है।

पॉइंट्स बराबर: पहले जीत, फिर नेट रन रेट

बराबर पॉइंट्स वाली टीमों की रैंकिंग सबसे पहले जीत की संख्या से होती है। जीत भी बराबर हों, तो जिसका नेट रन रेट बेहतर है, वह ऊपर। इसीलिए लीग के आख़िरी हफ़्तों में कमेंटेटर बार-बार नेट रन रेट की बात करते हैं: 14 पॉइंट्स वाली दो टीमों के बीच फ़र्क दशमलव के बाद के कुछ अंकों का भी हो सकता है।

नेट रन रेट का मतलब है: पूरे सीज़न में टीम ने प्रति ओवर औसतन जितने रन बनाए, उसमें से उसके ख़िलाफ़ प्रति ओवर बने औसत रन घटा दीजिए। जो टीम ऑल आउट हो जाए, उसके पूरे 20 ओवर गिने जाते हैं, न कि उतने ओवर जितने वह असल में टिक पाई, और सिर्फ़ नतीजे वाले मैच गिने जाते हैं। नेट रन रेट गाइड में एक पूरा उदाहरण हल करके दिखाया गया है, और नेट रन रेट कैलकुलेटर आपकी अपनी टेबल का हिसाब लगा देता है।

प्लेऑफ़: क्वालिफ़ायर 1, एलिमिनेटर और क्वालिफ़ायर 2

टॉप चार टीमें प्लेऑफ़ में पहुंचती हैं। IPL में सालों से चार मैचों वाला यही सीढ़ी जैसा सिस्टम चल रहा है:

  1. क्वालिफ़ायर 1: पहले और दूसरे नंबर की टीमें। जीतने वाली टीम सीधे फ़ाइनल में।
  2. एलिमिनेटर: तीसरे बनाम चौथे नंबर की टीम। हारने वाली टीम घर लौट जाती है।
  3. क्वालिफ़ायर 2: क्वालिफ़ायर 1 में हारी टीम बनाम एलिमिनेटर की विजेता, फ़ाइनल की दूसरी जगह के लिए।
  4. फ़ाइनल: क्वालिफ़ायर 1 और क्वालिफ़ायर 2 की विजेता टीमें।

टॉप दो में रहने की बड़ी अहमियत है: इन टीमों को फ़ाइनल में पहुंचने के दो मौके मिलते हैं, जबकि तीसरी और चौथी टीम को ख़िताब जीतने के लिए लगातार तीन नॉकआउट मैच जीतने पड़ते हैं।

उदाहरण: प्लेऑफ़ की सीढ़ी कैसे चलती है

लीग टेबल: P पहले, Q दूसरे, R तीसरे और S चौथे नंबर पर।

क्वालिफ़ायर 1: P ने Q को हराया, यानी P फ़ाइनल में और Q क्वालिफ़ायर 2 में।

एलिमिनेटर: S ने R को हराया, यानी R बाहर।

क्वालिफ़ायर 2: S ने Q को हराया, और S चौथे नंबर से फ़ाइनल तक पहुंच गई।

फ़ाइनल: P बनाम S।

विदेशी खिलाड़ी

कोई भी टीम अपनी प्लेइंग इलेवन में चार से ज़्यादा विदेशी खिलाड़ी नहीं रख सकती, और मैदान पर किसी भी समय चार से ज़्यादा विदेशी खिलाड़ी नहीं हो सकते। बाकी सात या उससे ज़्यादा खिलाड़ी भारतीय होते हैं, और इसी वजह से यह लीग युवा भारतीय क्रिकेटरों के लिए इतना बड़ा मंच है। स्क्वॉड इससे बड़े होते हैं: 2025 के मेगा ऑक्शन के लिए हर स्क्वॉड में 18 से 25 खिलाड़ी होने ज़रूरी थे, जिनमें आठ से ज़्यादा विदेशी नहीं हो सकते थे।

ऑक्शन और रिटेंशन

IPL की टीमें ऑक्शन (नीलामी) में बनती हैं। हर कुछ साल में एक मेगा ऑक्शन होता है, जिसमें ज़्यादातर खिलाड़ी फिर से पूल में चले जाते हैं और स्क्वॉड नए सिरे से बनते हैं; 2025 का सीज़न लीग के पांचवें मेगा ऑक्शन के बाद खेला गया। बीच के सालों में छोटे ऑक्शन होते हैं, जिनसे रिलीज़ किए गए खिलाड़ियों की ख़ाली जगहें भरी जाती हैं।

ऑक्शन से पहले हर टीम कुछ खिलाड़ियों को अपने पास रख सकती है। 2025 के मेगा ऑक्शन से पहले कोई टीम कुल मिलाकर अपने छह खिलाड़ी तक रख सकती थी, या तो ऑक्शन से पहले उन्हें रिटेन करके या फिर राइट टू मैच कार्ड इस्तेमाल करके। इस कार्ड से टीम अपने किसी पुराने खिलाड़ी पर लगी सबसे ऊंची बोली की बराबरी करके उसे वापस ले सकती है। हर टीम एक तय पर्स से बोली लगाती है, जो उस ऑक्शन के लिए 120 करोड़ भारतीय रुपये था। ये आंकड़े हर ऑक्शन से पहले नए सिरे से तय होते हैं, इसलिए आप जिस सीज़न के बारे में पढ़ रहे हैं, उसके आंकड़े ज़रूर जांच लें।

इम्पैक्ट प्लेयर नियम

2023 से IPL में हर टीम मैच के दौरान एक सब्स्टिट्यूट ला सकती है, जिसे इम्पैक्ट प्लेयर कहा जाता है। कप्तान टॉस के समय कुछ सब्स्टिट्यूट के नाम देता है और तय मौके पर, जैसे किसी पारी की शुरुआत में या किसी ओवर के ख़त्म होने पर, उनमें से एक को टीम में ला सकता है; जिस खिलाड़ी की जगह वह आता है, वह आगे मैच में हिस्सा नहीं लेता। जिस टीम की इलेवन में चार विदेशी खिलाड़ी हों, वह इस तरह सिर्फ़ भारतीय खिलाड़ी ही ला सकती है। यह नियम 2026 सीज़न तक लागू रहा और तब से इसकी समीक्षा चल रही है, इसलिए इस पर भरोसा करने से पहले मौजूदा सीज़न की प्लेइंग कंडीशंस देख लें।

IPL का फ़ॉर्मेट अपने क्लब में

क्लब लीग IPL से बहुत कुछ लेती हैं: जीत पर दो पॉइंट्स, बराबर पॉइंट्स होने पर जीत और नेट रन रेट से फ़ैसला, और आख़िर में प्लेऑफ़। Manage Cricket के साथ आप अपना टूर्नामेंट ऐसी लीग के रूप में चला सकते हैं जो टॉप दो के फ़ाइनल या टॉप चार के सेमीफ़ाइनल पर ख़त्म हो, हर मैच की गेंद-दर-गेंद स्कोरिंग कर सकते हैं और पॉइंट्स टेबल को अपने आप अपडेट होने दे सकते हैं। अगर बारिश से मैच छोटा हो जाए, तो DLS कैलकुलेटर नया टारगेट तय कर देता है।

सवाल और जवाब

IPL प्लेऑफ़ के लिए कितनी टीमें क्वालिफ़ाई करती हैं?

चार। पहले और दूसरे नंबर की टीमें क्वालिफ़ायर 1 खेलती हैं, तीसरे और चौथे नंबर की टीमें एलिमिनेटर, और क्वालिफ़ायर 1 में हारी टीम क्वालिफ़ायर 2 में एलिमिनेटर की विजेता से भिड़ती है।

IPL में टीमों के पॉइंट्स बराबर हों तो क्या होता है?

जिस टीम ने ज़्यादा मैच जीते हैं, वह ऊपर रहती है। जीत भी बराबर हों, तो बेहतर नेट रन रेट से फ़ैसला होता है।

IPL मैच में कितने विदेशी खिलाड़ी खेल सकते हैं?

प्लेइंग इलेवन में चार से ज़्यादा नहीं, और मैदान पर किसी भी समय चार से ज़्यादा नहीं।

क्या IPL में अब भी इम्पैक्ट प्लेयर नियम लागू है?

यह नियम 2023 से 2026 सीज़न तक लागू रहा और तब से इसकी समीक्षा चल रही है। मौजूदा सीज़न की प्लेइंग कंडीशंस ज़रूर देखें।