पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) कैसे चलती है
PSL पाकिस्तान की फ़्रैंचाइज़ी T20 लीग है, जिसे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड चलाता है। यह गाइड बताती है कि पहले लीग मैच से लेकर फ़ाइनल तक एक सीज़न का फ़ैसला कैसे होता है, और सिर्फ़ वही बातें बताती है जो हर सीज़न में काम आएं।
लेखक: Manage Cricket टीम · अपडेट
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PSL क्या है
पाकिस्तान सुपर लीग शहरों के नाम वाली फ़्रैंचाइज़ी टीमों का T20 टूर्नामेंट है, जिसे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) करवाता है। इसकी शुरुआत 2016 में पांच टीमों के साथ हुई, 2018 में छठी टीम जुड़ी और 2026 में दो नई फ़्रैंचाइज़ी आने के बाद टीमें आठ हो गईं। हर टीम में पाकिस्तानी खिलाड़ी होते हैं, जिनमें उभरते हुए युवा खिलाड़ी भी शामिल हैं, और उनके साथ विदेशी क्रिकेटर भी।
हर मैच आम T20 जैसा ही होता है: हर टीम के 20 ओवर, कोई भी गेंदबाज़ चार ओवर से ज़्यादा नहीं डाल सकता, और हर पारी की शुरुआत में छह ओवर का पावरप्ले, जिसमें 30 गज़ के घेरे के बाहर सिर्फ़ दो फ़ील्डर रह सकते हैं। PSL को अलग बनाता है इसका सीज़न चलाने का तरीका और यह नियम कि टीम में कौन खेल सकता है।
लीग स्टेज और पॉइंट्स
सीज़न लीग स्टेज से शुरू होता है। टीमें तय शेड्यूल के हिसाब से पाकिस्तान के अलग-अलग मैदानों पर एक-दूसरे से खेलती हैं, और हर नतीजा एक ही पॉइंट्स टेबल में जुड़ता है। पॉइंट्स का हिसाब बिल्कुल सीधा है:
| नतीजा | पॉइंट्स |
|---|---|
| जीत | 2 |
| कोई नतीजा नहीं या मैच रद्द | दोनों को 1-1 |
| टाई, जब सुपर ओवर न हो सके | दोनों को 1-1 |
| हार | 0 |
मैच टाई हो जाए तो जहां तक हो सके उसे टाई पर नहीं छोड़ा जाता: विजेता तय करने के लिए दोनों टीमें सुपर ओवर खेलती हैं, यानी एक-एक ओवर, और जीतने वाली टीम दोनों पॉइंट्स ले जाती है। पॉइंट्स तभी बंटते हैं जब सुपर ओवर पूरा न हो पाए।
जब टीमों के पॉइंट्स बराबर हों
कट-ऑफ़ के आसपास अक्सर कई टीमों के पॉइंट्स बराबर होते हैं, इसलिए कई बार टाई-ब्रेक से ही तय होता है कि प्लेऑफ़ में कौन पहुंचेगा। PSL की प्लेइंग कंडीशंस के मुताबिक बराबर पॉइंट्स वाली टीमों को इस क्रम में अलग किया जाता है:
- लीग स्टेज में ज़्यादा जीत।
- जीत भी बराबर हों, तो बेहतर नेट रन रेट।
- फिर भी बराबरी रहे, तो नतीजे वाले मैचों में डाली गई हर लीगल गेंद के हिसाब से ज़्यादा विकेट।
- अगर इससे भी फ़ैसला न हो, तो सिक्का उछालकर।
नेट रन रेट का मतलब है: पूरे लीग स्टेज में टीम ने प्रति ओवर जितने रन बनाए, उसमें से प्रति ओवर दिए गए रन घटा दीजिए। जो टीम जल्दी ऑल आउट हो जाए, उसे ऐसे गिना जाता है जैसे उसने पूरे 20 ओवर खेले हों, बिना नतीजे वाले मैच हिसाब से बाहर रहते हैं, और सुपर ओवर कभी नहीं गिना जाता। हमारी नेट रन रेट गाइड में एक उदाहरण के साथ पूरा हिसाब समझाया गया है, और मुफ़्त नेट रन रेट कैलकुलेटर यह जोड़-घटाव आपके लिए कर देता है।
प्लेऑफ़: टॉप दो टीमों को दूसरा मौका
टेबल की टॉप चार टीमें आगे जाती हैं। सीधे सेमीफ़ाइनल की जगह PSL में एक सीढ़ी जैसा सिस्टम है, जिसमें पहले या दूसरे नंबर पर रहने का पूरा फ़ायदा मिलता है:
- क्वालिफ़ायर 1: पहले और दूसरे नंबर की टीमें भिड़ती हैं। जीतने वाली टीम सीधे फ़ाइनल में।
- एलिमिनेटर: तीसरे और चौथे नंबर की टीमों का मुकाबला। हारने वाली टीम बाहर।
- क्वालिफ़ायर 2: क्वालिफ़ायर 1 में हारी टीम और एलिमिनेटर जीतने वाली टीम फ़ाइनल की दूसरी जगह के लिए खेलती हैं।
- फ़ाइनल: क्वालिफ़ायर 1 की विजेता बनाम क्वालिफ़ायर 2 की विजेता।
कुछ सीज़न में इन मैचों के नाम क्वालिफ़ायर, एलिमिनेटर 1 और एलिमिनेटर 2 रखे गए, लेकिन सिस्टम वही रहा। टॉप दो टीमें एक मैच हारकर भी फ़ाइनल में पहुंच सकती हैं, जबकि तीसरे और चौथे नंबर की टीमों को ट्रॉफ़ी उठाने के लिए लगातार तीन मैच जीतने पड़ते हैं।
टेबल का आख़िरी क्रम: A पहले, B दूसरे, C तीसरे और D चौथे नंबर पर।
क्वालिफ़ायर 1: B ने A को हराया। B फ़ाइनल में।
एलिमिनेटर: C ने D को हराया। D बाहर।
क्वालिफ़ायर 2: A ने C को हराया। A ने अपना दूसरा मौका भुना लिया।
फ़ाइनल: B बनाम A।
मौसम के लिए अलग नियम है। अगर प्लेऑफ़ का कोई मैच बिना नतीजे के ख़त्म हो, तो लीग में ऊपर रही टीम आगे जाती है। फ़ाइनल के लिए रिज़र्व डे रखा जाता है, और अगर वह भी बारिश में धुल जाए, तो लीग स्टेज में ऊपर रही टीम चैंपियन घोषित होती है। यह भी एक वजह है कि लीग टेबल आख़िर तक इतनी अहम रहती है।
विदेशी और इमर्जिंग खिलाड़ी
हर टीम की प्लेइंग इलेवन में कम से कम सात पाकिस्तानी खिलाड़ी और तीन या चार विदेशी खिलाड़ी होने चाहिए, यानी टीम में कभी चार से ज़्यादा विदेशी खिलाड़ी नहीं होते। स्थानीय खिलाड़ियों में से कम से कम एक इमर्जिंग (उभरता हुआ) खिलाड़ी होना ज़रूरी है, और इसी नियम की वजह से हर मैच में युवा क्रिकेटरों को जगह मिलती है।
यह सीमा सब्स्टिट्यूट पर भी लागू होती है। जिस टीम ने चार विदेशी खिलाड़ी चुने हैं, वह किसी विदेशी सब्स्टिट्यूट को सिर्फ़ किसी दूसरे विदेशी खिलाड़ी की जगह ही मैदान पर भेज सकती है, ताकि एक समय में मैदान पर चार से ज़्यादा विदेशी खिलाड़ी कभी न हों।
ड्राफ़्ट से ऑक्शन तक
अपने पहले दस सीज़न में PSL ने टीमें प्लेयर्स ड्राफ़्ट के ज़रिए बनाईं। खिलाड़ियों को प्लैटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और इमर्जिंग जैसी कैटेगरी में रखा जाता था, और टीमें बारी-बारी से हर कैटेगरी से खिलाड़ी चुनती थीं। आख़िर में स्क्वॉड पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्री पिक होते थे। टीमें पिछले सीज़न के कुछ खिलाड़ियों को रिटेन भी कर सकती थीं।
2026 सीज़न से PCB ने ड्राफ़्ट की जगह प्लेयर ऑक्शन (नीलामी) शुरू किया, जो लीग के इतिहास में पहली बार हुआ। ऑक्शन में टीमें हर खिलाड़ी के लिए एक-दूसरे से बढ़-चढ़कर बोली लगाती हैं और उन्हें तय सैलरी पर्स के अंदर रहना होता है। ऑक्शन से पहले वे अब भी सीमित संख्या में खिलाड़ी रिटेन कर सकती हैं। कितने खिलाड़ी रिटेन हो सकते हैं और पर्स कितना होगा, ऐसी बातें PCB हर सीज़न से पहले तय करता है, इसलिए आप जिस साल का सीज़न देख रहे हैं, उसके लिए PCB की घोषणा ज़रूर देखें।
PSL की तरह अपनी लीग चलाइए
PSL का ढांचा क्लब टूर्नामेंट के लिए भी बढ़िया काम करता है: राउंड रॉबिन, जीत पर दो पॉइंट्स, बराबरी तोड़ने के लिए नेट रन रेट और आख़िर में प्लेऑफ़। Manage Cricket में आप अपना टूर्नामेंट लीग फ़ॉर्मेट में चला सकते हैं, जिसके आख़िर में टॉप दो टीमों का फ़ाइनल हो या टॉप चार के सेमीफ़ाइनल, और हर नतीजे के बाद पॉइंट्स टेबल और नेट रन रेट अपने आप अपडेट हो जाते हैं। पहले कागज़ पर लीग की प्लानिंग करना चाहते हैं? मुफ़्त पॉइंट्स टेबल मेकर आज़माइए।